एच डी देवेगौड़ा
May 18, 1933
11:00:00
Hassan
76 E 3
13 N 1
5.5
The Times Select Horoscopes
सटीक (स.)
H. D. Deve Gowda क्रियात्मक स्वभाव के व्यक्ति हैं और सदैव गतिशील रहते हैं। H. D. Deve Gowda हमेशा योजना बनाते रहते हैं और अकर्मण्यता को कभी भी सहन नहीं कर सकते हैं। H. D. Deve Gowda के अन्दर पर्याप्त इच्छाशक्ति है और स्वतन्त्रता का भाव H. D. Deve Gowda के अन्दर कूट-कूट के भरा हुआ है। दूसरों का दखल H. D. Deve Gowda अपने काम में बर्दाश्तन हीं करते। H. D. Deve Gowda के लिये अपने विचारों व कार्यों की स्वतन्त्रता सर्वोपरि है।H. D. Deve Gowda मौलिक सोच रखते हैं, जोकि बहुआयामी होती हैं। H. D. Deve Gowda नये तरीकों का अन्वेषण अथवा उद्देश्यपूर्ण मौलिक आविष्कार कर सकते हैं। H. D. Deve Gowda संसार को अपने कार्यों से एक नयी दिशा देंगे।इसमें कोई शंका नहीं है कि H. D. Deve Gowda ईमानदारी को व्यापक रूप से प्रयोग कर नव-कीर्तिमान स्थापित करेंगे। H. D. Deve Gowda अपने मित्रों से अपने उद्देश्य, अपनी बात, आर्थिक विषय इत्यादि में ईमानदार होने की उम्मीद करते हैं।दूसरों के साथ H. D. Deve Gowda का व्यवहार H. D. Deve Gowda की सबसे बड़ी कमजोरी है। H. D. Deve Gowda अकुशलता को सहन नहीं कर सकते और जो लोग H. D. Deve Gowda की आंखों से आंखें मिलाकर नहीं देख सकते, H. D. Deve Gowda उन्हें हेय दृष्टि से देखते हैं। H. D. Deve Gowda को उन लोगों के प्रति सहनशीलता का गुण विकसित करना चाहिये, जिन्हे H. D. Deve Gowda प्रायः अस्वीकृत कर देते हैं। कुछ भी हो, कम से कम यह प्रयास करने योग्य है।
H. D. Deve Gowda को प्रायः निराशा का सामना करना पडता है और H. D. Deve Gowda को अधिक की उम्मीद रहती है। H. D. Deve Gowda के इतने परेशान रहने के कारण H. D. Deve Gowda को जिन बातों का डर लगता है वह प्रायः घटित हो जाती हैं। H. D. Deve Gowda बहुत शर्मीले हैं, और स्वयं की अनुभूति एवं भावनाओं को व्यक्त करने में H. D. Deve Gowda परेशानी महसूस करते हैं। यदि H. D. Deve Gowda अपनी सारी सांसारिक समस्याओं को भूलकर प्रतिदिन कुछ क्षण ध्यान मुद्रा में बैठेंगे, तो पायेंगे कि दुनिया उतनी बुरी नहीं है जितनी प्रतीत होती है।H. D. Deve Gowda एक ही स्थान पर टिककर रहने वालों में से नहीं होंगे और इसी वजह से अधिक समय तक अध्ययन करना H. D. Deve Gowda को रास नहीं आएगा। इसका प्रभाव H. D. Deve Gowda की शिक्षा पर पड़ सकता है और उसके कारण H. D. Deve Gowda की शिक्षा में कुछ रुकावटें आ सकती है। अपने आलस्य पर विजय प्राप्त करने के बाद ही H. D. Deve Gowda शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। H. D. Deve Gowda के अंदर अज्ञात को जानने की तीव्र उत्कंठा है और H. D. Deve Gowda की कल्पनाशीलता H. D. Deve Gowda को अपने विषयों में काफी हद तक सफलता दिलाएगी। इसका दूसरा पक्ष यह है कि H. D. Deve Gowda को अपनी एकाग्रता को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए ताकि जब H. D. Deve Gowda अध्ययन करने बैठें तो H. D. Deve Gowda को किसी तरह की समस्या का सामना ना करना पड़े और H. D. Deve Gowda की स्मरण शक्ति भी H. D. Deve Gowda की मदद करे। यदि H. D. Deve Gowda मन लगाकर मेहनत करेंगे और अपनी शिक्षा के प्रति आशान्वित रहेंगे तो कितने भी व्यवधान आएं, H. D. Deve Gowda अपने क्षेत्र में सफल होकर ही रहेंगे।
H. D. Deve Gowda अपने वैवाहिक जीवन के आनन्द को सदैव हीे बढ़ाना चाहते हैं। यदि बाह्य तथ्यों से H. D. Deve Gowda को यह लगता है कि भौतिक सम्पन्नता जीवन के लिये नितान्त आवश्यक है, तो H. D. Deve Gowda उसे प्राप्त करने के लिये पूर्ण प्रयास करते हैं। H. D. Deve Gowda का लक्ष्य चाहें कुछ भी हो, लेकिन कार्य ही H. D. Deve Gowda के लिये प्रेरणा है। इसे जानते हुए, न कि इसका विरोध करते हुए इसका ठीक इस्तेमाल करें।